प्लास्टिक कचरे पर लगेगी लगाम, नई योजना पर काम शुरू
दिल्ली। सरकार ने प्लास्टिक कचरे से बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस) लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन शुरू कर दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह इस योजना के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर एक महीने के भीतर प्रस्ताव तैयार करे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में आयोजित मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में प्लास्टिक और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे से उत्पन्न गंभीर समस्याओं पर चर्चा की गई।
मंत्री ने बताया कि यह कचरा नालों को जाम करने, जल स्रोतों को प्रदूषित करने, मिट्टी को नुकसान पहुंचाने और खुले में जलने से वायु प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन रहा है। डीआरएस अन्य राज्यों में सफल रही है और दिल्ली को भी अपनी शहरी जरूरतों के अनुसार इसे अपनाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में लागू मॉडलों का अध्ययन कर दिल्ली के लिए उपयुक्त ढांचा तैयार किया जाए। प्रस्ताव में वित्तीय व्यवस्था, संस्थागत ढांचा, विभिन्न हितधारकों की भूमिका और प्रभावी क्रियान्वयन रणनीति को शामिल करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि यह योजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए कचरे को एक संसाधन में बदलने का अवसर भी देगी।
आखिर क्या है डिपॉजिट रिटर्न स्कीम
डिपॉजिट रिटर्न स्कीम एक इंसेंटिव आधारित प्रणाली है, जिसमें प्लास्टिक बोतल या पैकेजिंग पर खरीद के समय एक छोटी राशि जमा के रूप में ली जाती है। उपभोक्ता जब इन खाली वस्तुओं को निर्धारित कलेक्शन पॉइंट्स पर लौटाते हैं, तो उन्हें यह राशि वापस मिल जाती है। इससे कचरे के पृथक्करण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलता है। दुनिया के 40 से अधिक देशों में लागू इस प्रणाली से 90 प्रतिशत से अधिक रिटर्न रेट हासिल किया गया है, जबकि जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों में यह आंकड़ा लगभग 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

गाने के बाद कार्रवाई, पुलिस ने आयोजकों का ‘बैंड’ बजाया
छात्रों के लिए राहत भरी खबर: भीषण गर्मी के चलते स्कूल समय में बदलाव, आदेश जारी