कनाडा पर अमेरिका की सख्ती, ट्रंप ने बढ़ाया आयात शुल्क का बोझ
वॉशिंगटन/ओटावा: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले अधिकांश सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि यह कदम ऑटोमोबाइल, डेयरी और शराब (अल्कोहल) जैसे क्षेत्रों में कनाडा द्वारा अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ किए जा रहे 'भेदभावपूर्ण रवैये' और असमान व्यवहार के जवाब में उठाया गया है। यह नया 50% शुल्क आगामी 19 अगस्त 2026 से प्रभावी हो जाएगा, जिसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक बड़े 'टैरिफ वॉर' की शुरुआत माना जा रहा है।
दैनिक वस्तुओं से लेकर औद्योगिक सामान पर गिरेगी गाज
वाइट हाउस द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अमेरिकी कारोबारियों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए यह कठोर निर्णय लेना आवश्यक था। इस नए 50% टैरिफ के दायरे में वाइन्स और हॉकी स्टिक जैसी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों से लेकर कमर्शियल सीमेंट जैसे बड़े औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका ने राहत देते हुए ऊर्जा उत्पाद (Energy Products), पोटाश, आवश्यक खनिज (Critical Minerals) और मछली जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कनाडाई आयातों को फिलहाल इस शुल्क के दायरे से बाहर रखा है।
USMCA समझौते के बावजूद लागू होगा टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 50% शुल्क उन सभी संबंधित उत्पादों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे अमेरिका-कनाडा-मैक्सिको मुक्त व्यापार समझौते (USMCA/CUSMA) के तहत आते हों या नहीं। गौरतलब है कि अमेरिका पहले से ही कनाडाई स्टील, एल्युमीनियम, सॉफ्टवुड लकड़ी और ऑटो पार्ट्स पर अलग-अलग दर से शुल्क वसूल रहा है, जबकि कनाडा भी जवाबी कार्रवाई के रूप में अमेरिकी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाता आ रहा है।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने अमेरिकी कदम को एकतरफा कार्रवाई और मुक्त व्यापार समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत और जवाबी कदमों के लिए तैयार है। ओटावा और वॉशिंगटन के बीच लंबे समय से जारी व्यापार वार्ता के विफल होने के बाद 19 अगस्त से लागू होने वाले इस आदेश से दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में भारी खटास आने की आशंका जताई जा रही है।

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