महानगरों में हवा जहरीली होने का अब बच्चों के दिमाग पर हो रहा सीधा असर
नई दिल्ली। महानगरों में हवा जहरीला होना सांस की बीमारियों तक सीमित नहीं है। यह मासूम बच्चों के दिमाग पर भी सीधा और जानलेवा हमला कर रहा है। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला देते हुए चिंता जताई है। डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक प्रदूषण और जहरीले धुएं के संपर्क में रहने से बच्चों में दिमाग (ब्रेन) कैंसर समेत कई अन्य तरह के ट्यूमर होने की आशंका बढ़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल आंकोलाजी की सहायक प्राध्यापक ने बताया कि वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले कोयले, डीजल और पेट्रोल के धुएं में पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसे अति-सूक्ष्म जहरीले कण होते हैं। ये प्रदूषक बच्चों में बाल्यावस्था में होने वाले कई प्रकार के ब्रेन कैंसर का कारण बन सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि लंबे समय तक इस दूषित हवा में सांस लेने से ब्रेन ट्यूमर का जोखिम बढ़ता है, हालांकि अभी इस विषय पर और भी शोध किए जा रहे हैं।
डॉक्टर के मुताबिक वाहनों के धुएं में मौजूद नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सीधे मस्तिष्क के ऊतकों तक पहुंच जाते हैं और उन्हें स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। संस्थान के ही एक अन्य वरिष्ठ विशेषज्ञ ने भी इस खतरे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल रिसर्च में यह सामने आया है कि ट्रैफिक के प्रदूषण, पीएम 2.5 और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के लगातार संपर्क में रहने से बच्चों में ब्रेन कैंसर का रिस्क बढ़ रहा है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दिल्ली-एनसीआर समेत देश के प्रमुख महानगरों की हवा बेहद गंभीर और घातक बनी हुई है।

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