बढ़ती गैस कीमतों ने बदली शादी की परंपरा, लोग चुन रहे सादगी
नई दिल्ली। राजधानी में एलपीजी सिलिंडर की कमी ने शादियों के मैन्यू पर तो कैंची चलाई ही थी अब तो लोग इस संकट से पार पाने के लिए वेडिंग प्वाइंट के बजाय कोर्ट मैरिज और मंदिरों में सादगीपूर्ण विवाह पर जोर दे रहे हैं। शादी के तय मुहूर्त के बीच गैस की कमी और महंगे सिलिंडर के खर्च से बचने के लिए विवाह टाले नहीं जा सकते हैं। इसलिए लोग इस तरह का विकल्प अपना रहे हैं। एलपीजी की उपलब्धता में कमी के चलते बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई स्थानों पर गैस की कमी के कारण बड़े आयोजन संभव नहीं हो पा रहे हैं, जिससे लोगों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं। ऐसे में दूल्हा-दुल्हन पहले कोर्ट में शादी रजिस्टर करवा रहे हैं और बाद में सीमित संख्या में परिवार के साथ आर्य समाज के मंदिरों में विवाह कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि एक ओर गैस की कमी है तो दूसरी ओर कुछ बैंक्वेट हॉल डीजल भट्टी के नाम पर अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं, जिससे शादी का खर्च बढ़ रहा है। ऐसे हालात में सादगी से शादी करना ही बेहतर विकल्प है। दिल्ली के वकीलों ने भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में कोर्ट मैरिज के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साकेत और तीस हजारी कोर्ट में पहले के मुकाबले अधिक जोड़े अपनी शादी रजिस्टर करवा रहे हैं। यदि एलपीजी संकट जल्द दूर नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पारंपरिक शादियों की जगह सादगीपूर्ण और सीमित आयोजनों का चलन और तेजी से बढ़ सकता है।
27 मार्च को तय थी शादी
हाल ही में यश शर्मा ने कोर्ट मैरिज की। उनके पिता आशीष शर्मा ने बताया कि बेटे की सगाई एक साल पहले हुई थी और 27 मार्च को शादी तय थी लेकिन एलपीजी की कमी के कारण बैंक्वेट बुक करना संभव नहीं हो सका। कहीं भी गैस उपलब्ध नहीं थी, जिसकी वजह से हमें बेटे की कोर्ट मैरिज का रास्ता अपनाना पड़ा।
अदालत से...
- पहले एक दिन में करीब 18 शादियां रजिस्टर होती थीं, लेकिन अब एलपीजी संकट के चलते यह संख्या दोगुनी हो गई है।
- एलपीजी की कमी और बढ़ते खर्च के कारण लोग पारंपरिक शादियों से हटकर सिविल मैरिज को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछले 20 दिनों में कोर्ट मैरिज के मामलों में तेजी आई है। बैंक्वेट हॉल में बढ़ते खर्च के कारण लोग सादगी से शादी करना बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

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