‘बॉर्डर 2’ देखने से पहले यहां पढ़ें ‘बॉर्डर 1’ की कहानी, जानिए कितनी की थी कमाई
‘बॉर्डर 2’ 1997 में आई सनी देओल की वॉर ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है। ऐसे में सिनेमाघरों में ‘बॉर्डर 2’ देखने से पहले आपको ‘बॉर्डर 1’ देखनी पड़ेगी। आप ‘बॉर्डर 1’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार पर देख सकते हैं। अगर आपके पास ‘बॉर्डर 1’ देखने का समय नहीं है और आप ‘बॉर्डर 2’ देखना चाहते हैं तो आप ‘बॉर्डर 1’ की कहानी शॉर्ट में यहां पढ़ सकते हैं।
‘बॉर्डर 1’ की कहानी
‘बॉर्डर 1’ (1997) की कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान हुई ‘लोंगेवाला की लड़ाई’ पर आधारित है। जब जंग के आसार नजर आए थे तब लोंगेवाला में मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी (सनी देओल) के नेतृत्व में 120 भारतीय जवानों की एक टुकड़ी तैनात की गई थी। उन्हें अपने सोर्सेस से पता चला था कि पाकिस्तान की एक पूरी टैंक रेजिमेंट (लगभग 2000-3000 सैनिक) उसी रात उन पर हमला करने वाली है। ऐसे में वे वायुसेना (एयरफोर्स) से मदद मांगते हैं, लेकिन उस वक्त हंटर विमान रात में उड़ान नहीं भर सकते थे इसलिए जवानों को अगली सुबह सूरज निकलने तक पोस्ट की रक्षा करने का आदेश दिया गया था। पूरी रात भारतीय जवान अपनी वीरता और सूझबूझ से पाकिस्तानी सेना को रोके रखे थे और सुबह होते ही विंग कमांडर एम.के. बाजवा (जैकी श्रॉफ) के नेतृत्व में एयरफोर्स ने दुश्मन के टैंकों को तबाह कर दिया था। भारत युद्ध तो जीत गया था, लेकिन कई जांबाज सिपाही शहीद हो गए थे।
आपको पता हैं बॉर्डर के ये फैक्ट्स?
फिल्म के अंत में क्या हुआ था?
मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी (सनी देओल) फिल्म के अंत तक जिंदा रहते हैं और अब ‘बॉर्डर 2’ में दिखाई गई जंग में मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। कैप्टन भैरों सिंह (सुनील शेट्टी) और लेफ्टिनेंट धर्मवीर भान (अक्षय खन्ना) शहीद हो जाते हैं। विंग कमांडर आनंद (जैकी श्रॉफ) जिंदा रहते हैं। वहीं तब्बू, पूजा भट्ट और बाकी सैनिकों का परिवार जिन्होंने सिविलियन्स का किरदार निभाया था वे अंत तक सुरक्षित रहते हैं।
‘बॉर्डर 1’ ने कितनी कमाई की थी?
‘बॉर्डर-1’ को 10 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था। Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फिल्म ने 1997 में भारतीय बॉक्स ऑफिस से 39.30 करोड़ रुपये की कमाई की थी। वहीं वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस से 64.98 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था।

माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन