मुंबई — वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बड़ी और राहत भरी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के थमने के संकेत मिलने के बाद क्रूड ऑयल के दामों में भारी कमी आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर राहत महसूस की जा रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालिया गतिविधियों के चलते ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई, जिसके बाद यह घटकर लगभग 90.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। इसके साथ ही डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी फिसलकर लगभग 84.02 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमतें 102 डॉलर के ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं, लेकिन ताजा नरमी से बाजार को थोड़ी स्थिरता मिली है।

तनाव में कमी और कूटनीतिक बातचीत के संकेत

कीमतों में आई इस अचानकि गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण दोनों पक्षों की ओर से सैन्य हमलों पर लगी रोक है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से सीधे सैन्य टकराव में कमी आई है। इसके अलावा, ईरान और ओमान के बीच समुद्री जलडमरूमध्य को लेकर हुई बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार में सप्लाई बाधित होने के डर को काफी हद तक कम कर दिया है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर अभी भी पैनी नजर रखी जा रही है।

पश्चिम एशिया में छिटपुट संघर्ष और सुरक्षा भंडार

एक तरफ जहां तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में अभी भी छिटपुट घटनाएं देखने को मिल रही हैं। हूती विद्रोहियों द्वारा क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसके जवाब में सऊदी गठबंधन ने भी जवाबी कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह के संघर्षों के बीच रक्षात्मक हथियारों और इंटरसेप्टर मिसाइलों के सीमित होते भंडार ने भी वैश्विक महाशक्तियों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

भविष्य में क्रूड के भाव और विशेषज्ञों का अनुमान

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की आगामी चाल पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताओं और शांति समझौतों पर निर्भर करेगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक रहती है और पूर्ण शांति स्थापित होती है, तो आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल के दाम गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं। इसके विपरीत, यदि संघर्ष दोबारा भड़कता है, तो कीमतें एक बार फिर उछलकर 115 डॉलर के स्तर को छू सकती हैं।