नई दिल्ली: देशभर में फैली तीव्र जन-आक्रोश की लहर और व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाने जा रही है। पेपर लीक जैसी अनियमितताओं पर लगाम कसने के उद्देश्य से दो वर्ष पुराने कानून में संशोधन हेतु एक नया विधेयक आज लोकसभा के पटल पर रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर होने वाली चर्चा के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने युवा सांसदों की टोली को अग्रिम पंक्ति में उतारा है।

कड़े प्रावधानों से कसता शिकंजा

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। नए संशोधन के तहत अनुचित साधनों के प्रयोग पर 5 से 10 वर्ष की कठोर कारावास और 50 लाख रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया जा रहा है, जो कि मौजूदा 3 से 5 वर्ष की सजा से काफी सख्त है। वहीं, संगठित गिरोहों द्वारा किए जाने वाले पेपर लीक मामलों में न्यूनतम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव है। न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने हेतु मामलों को फास्ट-ट्रैक अदालतों में भेजा जाएगा, जहां 2 माह के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। विधेयक में OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट और नकली एडमिट कार्ड निर्माण सहित कुल 15 तरह के कृत्यों को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।

संसद में गरमाएगी चर्चा की सरगर्मी

विधेयक पर चर्चा को सुचारू बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक बहस में हिस्सा लेने का आह्वान किया है। सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा, टीडीपी, शिवसेना, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) समेत विभिन्न सहयोगी दलों के 9 युवा सांसद मोर्चा संभालेंगे, जिनमें बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। विपक्ष की ओर से भी तृणमूल कांग्रेस की सायनी घोष सहित कई अन्य नेता इस बहस में अपनी बात रखेंगे। सरकार का मानना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस अति-संवेदनशील मुद्दे पर हंगामा करने के बजाय अर्थपूर्ण संवाद होना देश के हित में है।