वाशिंगटन: लगभग साढ़े चार वर्षों से जारी रूस और यूक्रेन के बीच भीषण संघर्ष में अब विराम की नई उम्मीद जगती दिख रही है। यूक्रेनी व अमरीकी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दोनों मुल्क संयुक्त रूप से एक नवीन शांति मसौदा तैयार करने में जुटे हैं, जिसे शीघ्र ही मॉस्को के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यह रणनीति समरभूमि के मौजूदा हालातों और कूटनीतिक बदलावों को केंद्र में रखकर गढ़ी जा रही है। वाशिंगटन का आकलन है कि यूक्रेन द्वारा हालिया महीनों में रूस के भीतरी इलाकों में किए गए दूरगामी हमलों के प्रभाव स्वरूप, मॉस्को अब सीमित हवाई युद्धविराम के प्रस्ताव पर विचार करने को अधिक तत्पर दिखाई दे रहा है। ऐसे किसी समझौते की स्थिति में यूक्रेनी ड्रोन और मिसाइलें रूसी भूभाग पर हमला नहीं करेंगी, जिससे क्रेमलिन को राहत मिल सकती है।

शीर्ष नेताओं की शिखर वार्ता और शांति की पहल

आगामी समय में यूक्रेनी राष्ट्रध्यक्ष व्लादिमीर जेलेंस्की और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमरीका में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता संभावित है। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य शांति प्रक्रिया के अगले दौर की दिशा तय करना होगा, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधे संवाद की संभावनाओं पर भी मंथन किया जा सकता है। जेलेंस्की पूर्व में कई बार यह दोहरा चुके हैं कि युद्ध के अंत का अंतिम निर्णय केवल पुतिन के हाथों में है। हालांकि, पूर्व के सभी प्रयास असफल रहे हैं क्योंकि क्रेमलिन किसी निष्पक्ष या तटस्थ देश में बैठक के बजाय यूक्रेनी राष्ट्रपति को मॉस्को आने का निमंत्रण देता रहा है, जिसे कीव औपचारिक एवं गंभीर वार्ता मानने से इंकार करता आया है।

युद्ध का बदलता स्वरूप और रक्षात्मक चुनौतियां

बीते कुछ महीनों की घटनाओं ने युद्ध के समूचे परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। एक ओर जहां यूक्रेन ने रूस के सैन्य व रणनीतिक अड्डों पर अपने लंबी दूरी के हमलों को तेज किया है, वहीं दूसरी ओर रूस भी यूक्रेनी बुनियादी ढांचे और शहरों पर मिसाइलों व ड्रोन से लगातार हमलावर है। इस बीच यूक्रेन को पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मध्य पूर्व के हालातों के कारण भी इन मिसाइलों की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है। जेलेंस्की ने सुरक्षात्मक सहायता को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र भी प्रेषित किया है, हालांकि अमरीका की ओर से अतिरिक्त सैन्य सहायता की उपलब्धता पर फिलहाल कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।