वैभव सूर्यवंशी ने बताया सफलता का मंत्र, 'अभ्यास वाले शॉट पर ही रहता है भरोसा'
जिम्बाब्वे के दौरे पर खेले गए तीसरे और अंतिम टी20 मुकाबले में युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की महज 15 साल की उम्र में खेली गई 81 रनों की उम्दा और आक्रामक पारी की बदौलत भारतीय टीम ने मेजबान जिम्बाब्वे को 35 रनों से करारी शिकस्त दी। इसी के साथ श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली युवा भारतीय टीम ने तीन मैचों की इस टी20 सीरीज को 3-0 से अपने नाम कर लिया। आपको बता दें कि भारत ने इससे पहले श्रृंखला का पहला मुकाबला 7 विकेट से और दूसरा मैच 90 रनों के बड़े अंतर से अपने नाम किया था।
वैभव सूर्यवंशी रहे ऐतिहासिक जीत के मुख्य नायक
इस पूरी सीरीज में अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से नवाजा गया। इतना ही नहीं, महज 15 वर्ष के इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज को पूरी श्रृंखला में लगातार बेहतरीन खेल दिखाने के लिए 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' के प्रतिष्ठित अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
वैभव ने इस छोटी सी 3 मैचों की सीरीज की तीनों पारियों में 50.33 की शानदार औसत और 196.10 के बेहद आक्रामक स्ट्राइक रेट से कुल 151 रन बनाए, और वे इस पूरी श्रृंखला में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे। सीरीज के सफलतापूर्वक समाप्त होने के बाद युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने मीडिया के साथ अपना विशेष गेम प्लान और अनुभव साझा किया।
वैभव सूर्यवंशी से बातचीत के मुख्य अंश
-
पिछले तीन दिनों के प्रदर्शन और अपने अनुभव पर क्या बोले वैभव? वैभव ने कहा, "बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। हरारे पहुंचने के बाद शुरुआती दो-तीन दिनों में हमारी टीम की तैयारी बेहद शानदार रही थी। मैं पहले भी यहां अंडर-19 विश्व कप खेल चुका हूं, इसलिए मुझे इस मैदान पर क्रिकेट खेलना हमेशा से बहुत पसंद रहा है। टीम के सभी साथियों, कप्तान और कोचिंग स्टाफ ने मेरा भरपूर साथ दिया, जिससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा और मैं बेहद खुश हूं।"
-
सीरीज में आने से पहले आपका दृष्टिकोण और मानसिकता क्या थी? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मेरा खेल का तरीका वही है जो सामान्य तौर पर मैं टी20 क्रिकेट में अपनाता हूं। मैं मैदान पर उतरकर सिर्फ अपनी टीम के लिए वही सब करने की कोशिश कर रहा था जिसकी टीम को जरूरत थी। तीनों ही मुकाबलों में मेरा मुख्य उद्देश्य पावरप्ले के दौरान टीम को एक मजबूत और ठोस शुरुआत दिलाना था। यदि एक बार मुझे अच्छी शुरुआत मिल जाती, तो मेरा पूरा फोकस उस पारी को बड़े स्कोर में तब्दील करने पर होता था। यही मेरा एकमात्र लक्ष्य रहता है।"
-
हरारे की परिस्थितियों और अपनी बल्लेबाजी शैली पर क्या कहा? वैभव ने बताया, "मैं क्रीज पर जाकर कोई अलग या असाधारण शॉट खेलने की कोशिश नहीं करता, बल्कि मैं केवल उन्हीं शॉट्स को खेलता हूं जिनका मैं नेट्स में लगातार अभ्यास करता हूं। अभ्यास सत्र के दौरान मैं जिन स्ट्रोक्स पर मेहनत करता हूं, मैच के दौरान बस उन्हीं को मैदान पर दोहराने का प्रयास करता हूं।"
-
भारत के लिए अपनी पहली ही पूर्ण सीरीज में 'मैन ऑफ द सीरीज' बनना कैसा अनुभव है? अपनी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए युवा बल्लेबाज ने कहा, "जी हां, यह सचमुच मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा अद्भुत पल है। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दिनों में ही 'मैन ऑफ द मैच' और 'मैन ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार पाना मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद गर्व का विषय है।"

भाजपा पर बरसे केजरीवाल, बोले- हमने पंजाब को शिक्षा में 27वें से पहले स्थान पर पहुंचाया
कारगिल वॉर मेमोरियल से राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, पीओके पर ही होगी हर बातचीत
पर्यटकों को बनाया शिकार, फर्जी रोमन थिएटर दिखाकर 10 साल तक ऐंठे हजारों रुपये
भारत की बेटियों का दम, ईशा सिंह ने जीता गोल्ड और मनु भाकर ने हासिल किया कांस्य
भारतीय महिला हॉकी टीम ने मेडल के लिए की बड़ी कुर्बानी, सविता ने खोले फिटनेस के राज
धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस को संदेश, 'मैं एक स्ट्रीट फाइटर हूं, दबने वाला नहीं'
सरकारी आदेश का इंतजार, केस वापसी को लेकर क्या है पूरा कानूनी नियम?