चंबल नदी में बेखौफ चल रहा ओवरलोड स्टीमर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी के साहसपुरा घाट पर बना पांटून पुल टूटने के बाद से स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह नजर आ रहा है। पुल हटने की वजह से इलाके के ग्रामीणों को नदी के उस पार जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मजबूरी का फायदा उठाकर नियमों को ताक पर रखकर स्टीमर का संचालन किया जा रहा है। महज 50 रुपये के किराए के चक्कर में लोगों को क्षमता से अधिक भरकर नदी पार कराई जा रही है, जिससे यात्रियों की जान पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर यूपी का सफर
पहले साहसपुरा घाट पर लोग पांटून पुल के जरिए आसानी से यूपी और एमपी के बीच आते-जाते थे, लेकिन अब पुल न होने से स्टीमर ही एकमात्र सहारा बचा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्टीमर को चलाने के लिए प्रशासन से कोई वैध अनुमति नहीं ली गई है और न ही इसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं। स्टीमर में क्षमता से कहीं ज्यादा मुसाफिरों को ठूंस-ठूंस कर बिठाया जा रहा है, जिससे चंबल नदी के बीचो-बीच कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। सोशल मीडिया पर इस खतरनाक सफर का वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासनिक मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले से अंजान बने बैठे हैं जिम्मेदार अधिकारी
कार्रवाई का आश्वासन:
इस पूरे गंभीर मामले पर वन विभाग के एसडीओ (SDO) श्याम सिंह चौहान ने अपनी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि नगरा घाट या इसके आसपास स्टीमर चलाने की कोई आधिकारिक परमिशन नहीं दी गई है। यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं था, और वे अब डीएफओ (DFO) से इसकी पूरी रिपोर्ट लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।
दूसरी तरफ, नगर थाना प्रभारी सुखदेव सिंह चौहान ने बताया कि यह लापरवाही भरा मामला उनके संज्ञान में आया है। पुलिस टीम को मौके पर भेजकर इसकी पूरी जांच कराई जा रही है। अगर स्टीमर का संचालन अवैध और नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो संचालक के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, प्रशासन की इस ढिलाई और बिना अनुमति चल रहे इस खेल ने आम जनता की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।

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