हाईकोर्ट फैसले के बाद धार में पहली बकरीद, सुरक्षा के बीच अमन-चैन से मनाया गया त्योहार
धार:मध्य प्रदेश सहित देश के सभी हिस्सों में आज त्याग और समर्पण का पर्व बकरीद (ईद-अल-अजहा) अकीदत और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार जिले में भोजशाला मामले पर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद यह पहली बकरीद है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर विशेष सतर्कता बरती गई। शहर की ऐतिहासिक लाट मस्जिद में सुबह ईद-अल-अजहा की मुख्य नमाज पूरी धार्मिक श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर बड़ी तादाद में मस्जिद पहुंचे, जहां नमाज के दौरान सामूहिक रूप से देश व प्रदेश में सुख-समृद्धि, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी गई।
नमाज के बाद उमड़ा उत्साह, एसपी सहित आला अफसरों ने दी मुबारकबाद
ऐतिहासिक लाट मस्जिद में सुबह विशेष नमाज के दौरान धार शहर और ग्रामीण अंचलों से आए हजारों नमाजी एक साथ सफों (कतारों) में बैठे नजर आए। जैसे ही नमाज मुकम्मल हुई, पूरा परिसर 'ईद मुबारक' की सदाओं से गूंज उठा। लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर त्योहार की बधाई दी और बड़ों का आशीर्वाद लिया। इस खुशी के मौके पर धार के पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर मौजूद रहकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को गले लगाया और उन्हें बकरीद की दिली मुबारकबाद पेश की।
शहर काजी का संदेश: त्याग, इंसानियत और सामाजिक सद्भाव को बढ़ाएं आगे
नमाज के उपरांत शहर काजी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए ईद का विशेष संदेश दिया। उन्होंने अपने पैगाम में समाज के सभी वर्गों से आपसी भाईचारे, त्याग, देशप्रेम और इंसानियत की भावना को और अधिक मजबूत करने की अपील की। काजी साहब ने कहा कि ईद-अल-अजहा का यह मुकद्दस त्योहार हमें अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने, समाज के गरीब व असहाय लोगों की सेवा करने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की सीख देता है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संवेदनशील बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अमला सुबह से ही अलर्ट मोड पर था। लाट मस्जिद परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और खुद वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे। इसके साथ ही, मस्जिद की तरफ आने वाले रास्तों पर यातायात (ट्रैफिक) व्यवस्था को पहले ही डाइवर्ट और नियंत्रित कर दिया गया था, ताकि नमाज अदा करने आ रहे अकीदतमंदों को आवागमन में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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