सिद्धारमैया के इस्तीफे की अटकलों के बीच डीके कैंप में खुशी, कर्नाटक में बढ़ी हलचल
मैसूर: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही सियासी सरगर्मियों के बीच अब इसका असर जमीन पर साफ तौर पर दिखने लगा है। मैसूर में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उनके मुख्यमंत्री बनने की मन्नत को लेकर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए। समर्थकों ने स्थानीय प्रसिद्ध गणपति मंदिर में जाकर भारी संख्या में नारियल फोड़े और भगवान से प्रार्थना की कि डीके शिवकुमार जल्द ही राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालें।
डीके शिवकुमार ने 40 वर्षों तक की कांग्रेस की सेवा
इस धार्मिक अनुष्ठान का नेतृत्व कर रहे 'कर्नाटक आर्मी' के जिला अध्यक्ष तेजेश लोकेश गौड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डीके शिवकुमार ने पिछले 40 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस पार्टी की सेवा की है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे के बाद, अब डीके शिवकुमार के पास राज्य का नेतृत्व करने का सबसे सही और उचित अवसर है। उन्होंने कहा कि हमने भगवान गणपति से यही प्रार्थना की है कि वे मुख्यमंत्री बनकर कर्नाटक को विकास के पथ पर आगे ले जाएं।
कल शपथ लेंगे शिवकुमार, जश्न की तैयारी
बेंगलुरु से लेकर मैसूर तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लेकर मंत्रियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता उमा शंकर ने पूरे भरोसे के साथ दावा किया कि डीके शिवकुमार कल ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक पल को बेहद बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, कर्नाटक के इस सियासी घटनाक्रम पर मुंबई में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में शिवकुमार को सीएम बनाने की चर्चा हमेशा से रही है, हालांकि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है कि वे किसे चुनते हैं।
वरिष्ठों का सम्मान और युवाओं को मौका: विजय वडेट्टीवार
इस बीच नागपुर में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया हमारी पार्टी के बेहद वरिष्ठ और आदरणीय नेता हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर बेहतरीन काम किया है और पार्टी में उनका सम्मान हमेशा बरकरार रहेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वरिष्ठ नेताओं के सम्मान के साथ-साथ नए और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना पार्टी के लिए एक बेहद सकारात्मक कदम है।
जातीय समीकरण और शिवकुमार की मजबूत पकड़
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच सत्ता का संतुलन बनाने की कोशिशें चल रही थीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुआ मंथन इसी खींचतान को सुलझाने के लिए था। डीके शिवकुमार की गिनती कर्नाटक के सबसे बड़े रणनीतिकारों में होती है, जिनकी राज्य के प्रभावशाली वोकलिगा और लिंगायत समुदायों के बीच काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उन्होंने पिछले चुनावों में संगठन को मजबूत कर कांग्रेस को सत्ता में लाने में मुख्य भूमिका निभाई थी, यही वजह है कि आलाकमान अब उनके नाम पर मुहर लगाता हुआ दिख रहा है।

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