मनरेगा योजनाओं में हितों के टकराव से बचाव के कदम
लखनऊ|उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा और विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के तहत वेंडर पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया है। अब इन योजनाओं में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवार की फर्मों को वेंडर के रूप में पंजीकरण नहीं मिलेगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की है।डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी और अन्य सेवाओं की आपूर्ति में पारदर्शिता रखी जाए। किसी भी तरह की अनियमितता या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें। उन्होंने वीबी- जीरामजी के कार्यों और उनमें उपयोग होने वाली सामग्री की आपूर्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों पर पूरी तरह से अमल न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।इस संबंध में जिलाधिकारियों (डीएम) और जिला कार्यक्रम समन्वयकों को पहले से पंजीकृत फर्मों की दोबारा जांच करने को कहा गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार ब्लॉक प्रमुख, बीडीओ, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और अन्य संबंधित कर्मचारियों के परिवार की फर्मों पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

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